
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। गंजी खाना, जेल रोड धार पर आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन 21 जुलाई को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा के समापन अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई तथा हवन की पूर्णाहुति कर क्षेत्र में उत्तम वर्षा, सुख-समृद्धि एवं लोककल्याण की प्रार्थना की गई।
कथा व्यास श्री दीपक जी महाराज ने अपने मुखारविंद से व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि वर्तमान समय में भगवान श्रीकृष्ण के सिद्धांत, आदर्श और जीवन-दर्शन को अपनाकर व्यक्ति जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता सहजता से प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना और सज्जनों की रक्षा करते हैं। आज के समय में धर्म की रक्षा से बड़ा कोई कार्य नहीं है, क्योंकि धर्म ही समाज को अपराध और बुराइयों से बचाने की शक्ति देता है।
महाराज श्री ने श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता निस्वार्थ सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता का प्रतीक होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा की हर संभव सहायता की, लेकिन कभी उसका प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और मोबाइल तक सीमित मित्रता के बजाय श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी सच्ची मित्रता का आदर्श अपनाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने मित्र के साथ खड़े रहें।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि केवल पूजा-पाठ करने से ही उत्तम वर्षा नहीं होती, बल्कि वृक्षारोपण और वृक्षों की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। हमारे शास्त्रों में वृक्षों को भगवान का स्वरूप माना गया है। यदि हम अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनका संरक्षण करेंगे, तभी प्रकृति संतुलित रहेगी, उत्तम वर्षा होगी और कृषि समृद्ध होगी।
कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने धर्म, संस्कार एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।

